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माता को सबसे अधिक प्रिय है इनकी बलि

नवरात्र के दिनों में माता को प्रसन्न करने के लिए कई स्थानों पर बलि प्रदान किया जाता है। इसका कारण यह है कि वेदों और पुराणों में बलि की बड़ी महिमा बताई गई है। माना जाता है कि बलि प्रदान करने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। इसलिए धूमधाम से बलि पूजन का इंतजाम किया जाता है।

शास्त्रों में बताया गया है कि बलिदान उन चीजों का करना चाहिए जिसके कारण मुक्ति के मार्ग में बाधा आ रही है

शास्त्रों में बताया गया है कि बलिदान उन चीजों का करना चाहिए जिसके कारण मुक्ति के मार्ग में बाधा आ रही है। मुक्ति के बाधक तत्व काम, क्रोध, मोह और लोभ हैं। मनुष्य को अपने इन्हीं शत्रुओं का बलिदान करना चाहिए। अगर क्रोध आपका शत्रु है तो माता के सामने संकल्प लेकर कहें कि आप क्रोध नहीं करेंगे। आपके इसी बलिदान से माता प्रसन्न हो जाएंगी।

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भेंड़ को क्रोध का प्रतीक मानकर, भैंस को मोह का प्रतीक मानकर तथा बकरे को काम का प्रतीक मानकर माता के सामने बलिदान करें और नियमित काम, क्रोध और मोह के कारण पाप कर्म करें तो यह बलिदान व्यर्थ जाएगा। माता ऐसे बलिदान से प्रसन्न नहीं होती हैं। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि आत्मबलिदान सबसे उत्तम बलिदान है। आत्मबलिदान का अर्थ है अपने अंदर के शत्रुओं का बलिदान।

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