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Drishyam 2 Review: सस्पेंस-थ्रिल से भरपूर अजय देवगन की फिल्म, अक्षय खन्ना करेंगे सरप्राइज, क्लाइमैक्स ने लूटा शो

इंडस्ट्री में शायद ही किसी फिल्म के सीक्वल को लेकर फैंस के बीच इतना हाइप्ड क्रिएट हुआ हो. बाहुबली के बाद जो पागलपन बाहुबली 2 को लेकर था, ठीक वही दीवानगी अजय देवगन की मूवी दृश्यम के प्रति भी फैंस में दिखती है. सात साल बाद सीक्वल लेकर लौटी फिल्म दृश्यम 2 कैसी बनी है, चलिए जानते हैं.

आर्थिक रूप से बॉलीवुड के लिए यह साल बहुत अच्छा नहीं रहा है। कुछ फिल्मों को छोड़ दें तो कई फिल्में बड़े बजट और बड़े सितारों के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाईं। वे कहते हैं कि अगर अंत अच्छा है तो सब अच्छा है, शायद दृश्यम 2 इस साल कमाल करेगी। हालाँकि, यह जानने के लिए इस समीक्षा को पढ़ें कि समीक्षकों के मानकों और मलयालम फिल्म की शुरुआत के अनुसार अजय देवगन की दृश्यम 2 का किराया कैसा है। इस बात की संभावना कम ही है कि कंपनी पर फिल्म सीरीज को लेकर अपने प्रशंसकों के बीच ज्यादा दबाव न रहा हो. बाहुबली के बाद बाहुबली 2 को लेकर जो क्रेज है, वही दृश्यम के फैन्स में देखने को मिल रहा है. इसके रिलीज होने के बाद हर साल 2 अक्टूबर को फिल्म देखने वालों के बीच फिल्म को लेकर मीम्स फैल गए। शायद इसीलिए सात साल की सीरीज के साथ वापसी कर रही इस फिल्म की एडवांस बुकिंग भी तेजी से हो रही है.

कहानी

क्या आप गोवा में रहने वाले विजय सलगांवकर, उनके परिवार को जानते हैं और उनके साथ हादसा 2 अक्टूबर को हुआ था। ‘दृश्यम 2’ ने सात साल बाद किसी कहानी को चुना है। विजय का परिवार अब भी सदमे में है और उसे समुदाय से अलग-थलग कर दिया गया है. जी हां, विजय एक केबल कंपनी से सिनेमा के मालिक बन गए हैं। सिनेमा को लेकर जुनूनी विजय अब एक फिल्म बनाना चाहते हैं। वह कहानी को लेकर मशहूर डायरेक्टर (सौरभ शुक्ला) से मिलता है। हालांकि, विजय अपनी रिकॉर्ड की गई फिल्मों की उच्चतम संख्या से खुश नहीं हैं। इसके लेखक फिर से काम कर रहे हैं। उधर, दो अक्टूबर को हुए हादसे के बाद से उनके परिवार में डर का माहौल है।

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बड़ी बेटी अंजू (इशिता दत्ता) को जहां एंजायटी अटैक आते हैं, तो वहीं मां नंदनी सलगांवकर (श्रेया सरन) भी अक्सर पुलिस को देखकर चौंक जाती है. गोवा में एसपी तरुण अहलावत (अक्षय खन्ना), जो मीरा(तब्बू) के दोस्त भी हैं, का तबादला हुआ है. अक्षय के आने के बाद केस रिवाइव होता है और पुलिस दोबारा लाश को खोजने में लग जाती है. इस बार पुलिस पूरी तैयारी के साथ विजय और उसके परिवार को पकड़ना चाहती है. जहां उन्हें डेविड (सिद्धार्थ बोडके) के रूप में एक अहम सुराग मिलता है. दोबारा क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन में फंसे इस परिवार के लिए क्या विजय हीरो साबित हो पाते हैं? क्या पुलिस को बॉडी मिल पाती है? डेविड के पास क्या राज है? पुलिस और विजय की दिमागी जंग में आखिर कौन जीतता है? इन सब सवालों के जवाब के लिए थिएटर की ओर रूख करें.

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डायरेक्शन

Drishyam 2 Review: सस्पेंस-थ्रिल से भरपूर अजय देवगन की फिल्म, अक्षय खन्ना करेंगे सरप्राइज, क्लाइमैक्स ने लूटा शो
Drishyam 2 Review: सस्पेंस-थ्रिल से भरपूर अजय देवगन की फिल्म, अक्षय खन्ना करेंगे सरप्राइज, क्लाइमैक्स ने लूटा शो

निशिकांत कामत की मौत के बाद अभिषेक पाठक ने फिल्म के सीक्वल की कमान अपने हाथों में ली. दृश्यम की सुपरसक्सेस के बाद लॉकडाउन में खाली बैठे कई सिनेमालवर्स ने मलयालम वर्जन देखी है, तो जाहिर है डायरेक्टर पर प्रेशर जरूर रहा होगा. यह कहना गलत नहीं होगा कि अभिषेक ने पूरी ईमानदारी से अपने काम को अंजाम तक पहुंचाया है. भले आपको क्लाइमैक्स पहले से पता हो लेकिन पूरी फिल्म के दौरान आपका इंट्रेस्ट बरकरार रहता है और जिन्हें नहीं पता, तो उनके लिए सोने पर सुहागा. फिल्म देखने के दौरान ऐसे कई मोमेंट्स हैं, जिसमें आप ताली बजाने पर मजबूर होते हैं और कुछ आपको हैरान कर देते हैं. फर्स्ट हाफ के शुरुआत का 20 मिनट छोड़ दें, तो पूरी फिल्म आपको बांधे रखती है. हालांकि मलयालम फिल्म में भी फर्स्ट हाफ को लंबा खींचा गया था. जबकि उसकी तुलना में यहां, मेकर्स ने स्मार्ट प्ले करते हुए उसे थोड़ा क्रिस्प रखा है. इंटरवल तक आते-आते फिल्म की रफ्तार तेज पकड़ती है और अंत तक सस्पेंस बरकरार रखने में कामयाब होती है. कोर्ट रूम ड्रामा, परिवार पर हाथ उठाती पुलिस, 2 अक्टूबर वाले जोक्स जैसे सीक्वेंस देखकर आपके इमोशन में उतार-चढ़ाव आते हैं. थ्रिल और सस्पेंस से भरा आखिर का बीस मिनट बहुत ही दमदार गुजरता है.

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टेक्निकल

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसकी जान है. जो हर सीक्वेंस पर थ्रिल बिल्ड-अप करने में फ्यूल का काम करता है. सिनेमैटोग्राफर सुधीर के चौधरी के कई खूबसूरत शॉट ने गोवा को एक अलग नजरिया दिया है. हालांकि कुछ क्लोजअप शॉट्स के एंगल स्क्रीन पर थोड़े अजीब लगते हैं. फिल्म शुरूआत के 20 मिनट स्लो है, जिसे एडिटर संदीप फ्रांसिस थोड़ा और क्रिस्प कर सकते थे.

एक्टिंग

अजय देवगन और तब्बू जैसे स्टार जब स्क्रीन पर एक साथ आते हैं, तो मैजिक क्रिएट होना लाजमी है. हालांकि प्रीक्वल की तुलना में यहां उनकी एक्टिंग उतना प्रभावित नहीं करती है. अक्षय खन्ना की एंट्री फिल्म का दिलचस्प पहलू है. अक्षय कहीं से भी अपने किरदार में कमतर साबित नहीं होते हैं. श्रेया सरन ने अपना काम डिसेंट किया है. बेटियों के रूप में इशिता और मृणाल का किरदार के प्रति कॉन्फिडेंस स्क्रीन पर साफ झलकता है. इंस्पेक्टर गायटोंडे के रूप में कमलेश सावंत का काम बेहतरीन है. सौरभ शुक्ला का इस फिल्म में अहम किरदार है, जहां मजबूती से वे अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाते हैं. रजत कपूर को स्क्रीन स्पेस उतना नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने अपना काम ईमानदारी से निभाया है. ओवरऑल परफॉर्मेंस के मामले में थोड़ी सी वीकर लगती है.

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क्यों देखें

अगर आपने साउथ वर्जन भी देखा है, तो भी दावा है कि फिल्म देखकर आप निराश नहीं होंगे. फैमिली एंटरटेनमेंट इस फिल्म में भरपूर सस्पेंस और ड्रामा मिलेगा. सलगांवकर परिवार की दुनिया दोबारा सात साल बाद लौटी है, आप इसमें अपनी फैमिली संग प्रवेश कर इसे दोबारा एंजॉय कर सकते हैं.

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